Tuesday, July 16, 2019

आख़िर लड़की ही दोषी क्यों?


मजबुर होकर लिखना पड़ा कि आखिर एक लड़की ही क्यों दोषी है? उसका भाई भी है और उसके माता पिता भी हैं कहीं ना कहीं। इस पोस्ट में जाती भेद से कोई लेना देना नहीं बल्कि उस मानसिकता की है जो कुंठित समाज और कुंठित परिवार में रहती है एक लड़की। जब वो ख़ुद से फ़ैसला लेने लगे तो ना जाने क्या क्या नहीं सहना पड़ता!!!

प्यार करना कोई गुनाह नहीं और ना ही प्रेम विवाह। लोग किस बात पर भड़क रहे हैं कि जाती दोनों की समान नहीं, लड़का बिगड़ैल पहले से शादी शुदा और उम्र में काफी बड़ा, अय्याश, ना जाने कितनी बुराइयां बताई जा रही है आज। ख़ैर कोई बात नहीं शादी का फ़ैसला तो लेे लिया दोनों ने। आज दोनों को मीडिया और कानून का सहारा लेना पड़ा क्योंकि उनके जान को ख़तरा है। इन सब की क्यों ज़रूरत पड़ी?

जब अजितेश गलत था तो उसके भाई का दोस्त कैसे था? क्यों नहीं सवाल उठाया गया कि ऐसे इंसान के साथ मत रहो बेटा ये तो अय्याश है बिगड़ैल है तुम अच्छे इंसान के साथ रहो। समाज ने भी लापरवाही दिखाई। कायदे से बेटा हो या बेटी साथी हमेशा अच्छा चुनने की सलाह दी जाती है तो बेटा के पक्ष में क्यों नहीं?

बेटी जब बड़ी होने लगी तो उसे मां बाप ने उसे सिर्फ बेटी क्यों समझा दोस्त क्यों नहीं माना? उसके मन में उठ रहे सवाल को क्यों नहीं समझाया? यौन शिक्षा की जानकारी नहीं दी माता पिता ने। सिर्फ माता पिता का काम डांटना नहीं बल्कि प्यार करना और साथ ही उसे हर छोटी बड़ी बात को समझाना उनका काम है लेकिन अब भी माता पिता सिर्फ खाना, कपड़ा, दवाई, शिक्षा और शादी के समय दहेज देकर एक लड़का खरीद कर दे देते हैं। ये है माता पिता का काम। बेटा हो या बेटी आपको दोनों के साथ वक़्त देना उनके मन में चल रहे सवाल पर उनके जवाब को देना ये भी माता पिता का काम है। अगर आपका बेटा या बेटी अपने माता पिता से अपनी बात खुलकर नहीं कर पाए तो वो माता पिता के रूप में असफल माने जाते हैं। सेक्स एजुकेशन कहां से लेते हैं? उनसे लेते हैं जो बाहरी होता है। प्रेमी प्रेमिका बनकर सीखते हैं बातें करते हैं और बातें उस चरम सीमा तक पहुंच जाती है कि या तो भागकर शादी कर लेते हैं या बिना शादी के शारीरिक सम्बंध बना लेते हैं। सही समय पर सही जानकारी दी जाए तो कोई बच्चा अपने माता पिता का नाम ख़राब नहीं कर सकता।

अब फिर से वही बात चर्चा में है कि कोंख में फिर से मारेंगे बेटियों को मां बाप ताकी बेटी ऐसे कदम ना उठाए। लेकिन क्या कोंख़ में मार देना समाधान है? सोचो, समझो और सोच को बदलो। कुछ और भी अहम काम है माता पिता का वो काम माता पिता ही करें वो ज़्यादा अच्छा है भविष्य के लिए।

नेमत

No comments:

Post a Comment