आज मै एक लड़की होने के बावजूद एक लड़की के बारे में ऐसी घटना को साझा कर रही हूं जो बताना जरूरी लगा।
कल जब मैं एम्स हॉस्पिटल से लौट रही थी। मेट्रो ट्रेन में एक कपल की एंट्री होती है। लड़की ने मुझसे पूछा कि क्या ये ट्रेन चांदनी चौक जाएगी? मैंने कहा कि हां जाएगी। फिर एक अजीब सी हंसी के साथ अपने बॉयफ्रेंड को छूते हुए उसके कानों में कुछ कहा। वो लड़की बिना बात के हंसी और बार बार कुछ कहने के बहाने उस लड़के के क़रीब जाने लगी और जाना ये सब एक बहाना था। एक दो बार लड़के ने ये भी कहा कि सही से खड़ी हो जा.. फिर भी वो लड़की बाज नहीं आ रही थी। बस कुछ देर में उसने उसे पूरी तरह से जकड़ कर खड़ी हो गई। फिर क्या था.. कुछ लोग देख रहे थे तो कुछ लोग अपनी नज़रें नीचे तो कभी ऊपर.. वहां पर बुज़ुर्ग, जवान और बच्चे सभी थे। ना शर्म, ना लिहाज़, एकदम बेहयाई पर उतर आई। लड़का भी क्या करता बेचारा... बुजुर्ग की नज़रें कभी इधर तो कभी उधर, वहीं कुछ लोग लाइव रोमांस एन्जॉय कर रहे थे। मैं तस्वीर या विडियो लेना उचित नहीं समझी लेकिन इस घटना से मैं एक बात कहना चहूंगी कि हर बार लड़का ही गलत हो ये ज़रूरी नहीं।
हम कहते हैं रेप हो रहा है फांसी दो फांसी दो लेकिन इस कहानी में अगर लकड़ी के साथ शारीरिक संबध बन जाए फिर लड़का मुकर जाए शादी से तो क्या लड़का दोषी है? यही लड़की पुलिस के पास रिपोर्ट लिखाने जाएगी कि मेरा रेप हुआ है यौन शोषण हुआ है। लेकिन अब से इस तरह के मुद्दे पर सोच के बोलना होगा कि हर बार सिर्फ लड़का ही गलत हो.. जरूरी नहीं। ये लड़की अपना क़दम खुद से बढाई छूने देने का फिर अगर कुछ आगे का मामला बढ़ा तो लड़का रेपिस्ट हो गया।
बच्चे अपनी आंखो से देखकर क्या सीख ले रहे हैं? सोचिए आप सब भी कि हम आने वाले पीढ़ी को कैसा माहौल दे रहे हैं? जाने अंजाने उनको वक़्त से पहले ऐसी दलदल में डाल रहे हैं जिससे उनका बचपन अंधकार में जा रहा है।
महिलाओं को आज़ादी मिली है तो उसका सही इस्तेमाल करें ना कि घर परिवार समाज और भारतीय संस्कृति पर आंच आने दें। आप हर काम के लिए स्वतंत्र हैं लेकिन उसका सही ढंग से सदुपयोग करें।
नेमत
