Thursday, May 23, 2019

सिर्फ़ महिला सशक्तिकरण ही क्यों पुरुष सशक्तिकरण क्यों नहीं?


आज महिलाएँ पुरुषों के साथ कंधा से कंधा मिलाकर चल रही हैं। चाहे वो घर हो या दफ़्तर। महिलाओं को पहले की अपेक्षा अब और भी ज़्यादा काम करना पड़ता है जो कि पहले सिर्फ़ घर को ही संभालना होता था। महिलाओं को आगे लाया गया उनको सशक्त बनाया गया ताकि वो अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए दूसरे पर निर्भर ना रहें। बहुत हद तक महिलाओं को सशक्त बनाने में क़ामयाबी भी मिली। लेकिन सवाल ये उठता है कि आज घरेलू कामकाज़ के साथ-साथ बाहर पुरूषों की तरह 8 से 10 घण्टे की नौकरी करने के बाद जब घर में आती हैं तो फ़िर वही दुर्दशा है। आते ही घर के काम में लग जाना। उदाहरण के तौर पर बात करूं तो आज भी एक लड़की घर में दफ़्तर से आती है तो उसे अपने लिए एक ग्लास पानी से लेकर चाय और खाना सब कुछ स्वयं ही करना पड़ता है। क्योंकि वो एक महिला है। जब एक लड़का घर में आता है अपने दफ़्तर से तो उसके घर में अगर माँ हो, बहन हो या भाभी हो कोई भी हों लड़के के लिए पानी लाना, चाय बना कर देना, खाना परोस कर देना। ये आज भी हर घर के यही रीति रिवाज़ हैं। लेकिन महिला अगर बीमार हो या घर पर ना हों तब भी उस घर में पुरूष, दफ़्तर से आई महिला के लिए न पानी, न चाय और ना ही खाना परोस कर देते हैं। ये उदाहण सिर्फ़ एक उदाहरण नहीं है महिलाओं के अंदर की वो सम्वेदना है जो कहती हैं कि हमें बराबरी का हक़ तो मिला लेकिन इसके आड में बहुत अच्छे से शोषण भी किया जा रहा है। महिलाओं के काम को बढ़ा दिया गया घर के काम के साथ पैसे भी कमाओ लेकिन पुरुषों को ये बचपन से ये नहीं सिखाया गया कि आपको भी घर के कामकाज़ आने चाहिए। आप भी बरारबरी दिखाओ महिलाओं के साथ। तब बात सही मायनों में बराबरी का समझा जाएगा। ये तो महिलाओं को आगे बढ़ाकर सारे बोझ ही उनके सर पर डाल दिया गया है। आज जैसे महिला सशक्तिकरण का अभियान चलाया जा रहा है उसी तरह से पुरुष सशक्तिकरण का भी अभियान चलाया जाना चाइए। तभी हम गर्व से कह सकेंगे कि हमें बराबरी का दर्ज़ा मिला है अन्यथा ये महिलाओं के साथ अन्याय है।

3 comments:

  1. Now, your turn boys be ready for ghar ka kaamkaz like a woman...Dear Nemat good msg for all...😊 Keep it up👍

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