हम अक्सर ये देखते हैं कि जिस किसी भी घर में 15 या 16 साल की लड़की हो जाये तो माता-पिता की चिंता की लकीरें माथे पर दिखने लगती हैं अब तो लड़की बड़ी हो गई है ब्याह कराना है। 18 साल होते ही उनके हाथ पीले हो जाते हैं चाहे लड़की आगे पढ़ना चाहे या खुद को जॉब में सेटल करना करना चाहे इन सब से माता-पिता को कोई लेना देना नहीं। हाँ.. ये बात अब 100 प्रतिशत तो नहीं है लेकिन अब भी ये बात अधिकतर देखा गया है और लड़कियों के भी दिमाग में बैठ गया है कि मैं तो अब 18 साल की हो गयी हूं और अब कानून भी नहीं रोक सकता है। हम अपनी मर्ज़ी से शादी कर सकते हैं। इस बात से माँ-बाप भी आहत होते हैं। बेशक आप कर सकते हैं लेकिन क्या उन्हें अपनी ज़िम्मेदारी का पूरा एहसास है तभी वो आगे बढ़ें अन्यथा ना ही ख़ुद से ऐसा कदम उठाएं और ना ही उनके माता-पिता कहीं भी इतनी कम उम्र में उनकी शादी कराएं। ऐसा क्यों कहा जा रहा है आइए जानते हैं।
Saturday, October 9, 2021
लड़कियों की शादी की उम्र कम से कम 21 वर्ष हो
18 साल से कम उम्र में लड़कियों की शादी करना कानूनन ज़ुर्म है लेकिन जैसे ही 18 साल की होती हैं उनके माता-पिता को या लड़कियों को खुली छूट मिल जाती है। जबकि 0-18 साल तक सब बच्चे होते हैं। अब ये तो अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत सभी ने माना है तो क्या जैसे ही बच्ची की उम्र 18 साल से ज़्यादा हुई वो पूरी तरह से तैयार है शादी के लिए क्योंकि तब तक तो पढ़ाई भी पूरी नहीं कर पाती हैं और ना ही वो खुद को पैरों पर खड़े होने जैसा बना पाती हैं तो क्या ऐसे में कम से कम 21 साल लड़कियों को नहीं मिलनी चाहिए। जब यूपीएससी की परिक्षा देने के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष होती है तो शादी के लिए 18 वर्ष क्यों? यहाँ तो महिला होने के नाते 18 साल में परिक्षा देने की अनुमति नहीं है। सबके लिए समान आयु सीमा है।
यहाँ यूपीएससी से शादी की तुलना क्यों की?
यह समझने वाली बात है क्योंकि जब देश की ज़िम्मेदारी उठाने का सवाल आता है तब तैयारी और समझ दोनों ज़रूरी है लेकिन अगर ऐसे में कच्चे निकले तो देश का क्या होगा इसलिए पहले पूरी तैयारी उसके बाद परिक्षा और कई कठिन सवालों को पार करते हुए सफल होना? ठीक उसी प्रकार जब हम एक नई ज़िम्मेदारी को उठाने के लिए दो व्यक्तियों को आपस में मिलाते हैं तब एक उनका छोटा सा ख़ुद का समाज बनता है, देश बनता है या यूँ कहें कि पूरा संसार बनता है लेकिन ऐसे में माता-पिता की सोच क्यों नहीं बदली क्योंकि उन्होंने शब्दों पर कभी ध्यान आकर्षित नहीं किया। वो शब्द क्या हैं बताना ज़रूरी है कि "कम से कम" यही वो शब्द हैं 18 साल लड़की की शादी के लिए और 21 साल का लड़के का होना चाहिए। ऐसे में कम से कम कहा गया है ना कि इस उम्र का पडाव पार करते ही आप शादी के बंधन में बाँध दें। जब हम 18 साल की उम्र में होते हैं तो हमें सिर्फ़ मतदान करने का अधिकार प्राप्त है ना कि कोई मन्त्री बनने का क्योंकि वो भी एक ज़िम्मेदारियों से भरा हुआ काम है ऐसे में आप अपने घर को चलाने के लिए कितने ज़िम्मेदार हैं वो आपकी सोच पर निर्भर करेगा लेकिन जैसा कि मैंने कहा बिना समझ के बिना ज्ञान के कोई भी काम को ज़िम्मेदारी से नहीं निभाया जा सकता है। ऐसे में एक 18 साल के बच्ची को 19वें साल में कदम रखते ही किसी और के घर भेज देना या लड़कियों की उम्र से बहुत अधिक उम्र के लड़के से विवाह कराना शारीरिक रूप से भी नुकसानदेह है और सोच समझ ना मिलने के कारण उन्हें बहुत तकलीफ़ों का समाना करना पड़ता है। उसी तरह लड़कों को भी अपने मन के मुताबिक़ बात ना कर पाना भी आज के समय में आम समस्या बन गयी है और कहीं दूसरे व्यक्ति की तलाश में होते हैं ताकि अपनी समझ से मिलते जुलते लोग हों अपनी भावनाओं को व्यक्त कर सकें। अक्सर ये बातचीत में पाया गया है कि मेरी पत्नि मुझे समझती नहीं मैं क्या करूं किससे दिल की बात करूं तो भावनाओं का ना मिलना भी एक बहुत बड़ी समस्या है। महिलाओं का कहना होता है कि मेरे पति का दिमाग़ मुझसे नहीं मिलता। दोनों अलग अलग समझ रखते हैं और ये इस वजह से भी होता है कि उम्र के साथ हमारा मानव शरीर अलग-अलग उम्र में अलग-अलग हार्मोन को बनाता है। जो 20- 22 साल की लड़की एक शादी को लेकर जिस तरह उत्साहित होती है वो आगे चलकर 25 के बाद कुछ और ढंग से बात करेंगी और 30 के बाद कुछ और ढंग से अपनी बात को समझकर करने लगती हैं और ऐसा ही पुरुषों के साथ भी है। उम्र के साथ बदलते हार्मोंस ने उन्हें बहुत कुछ समझने और खुद को एक जिम्मेदारी की परख कराने में अहम भूमिका निभाता है। उम्र की परिपक्वता जीवन को आनन्दमय और सुखमय बनाता है। सही समय पर सही जानकारी और जिम्मेदारी का एहसास कराने में माता-पिता अपनी अहम भूमिका निभाएं और अपने बच्चों का जीवन सकारात्मक रूप में जीने का आधार बनाएं।
Yesss totally agree with Nemat
ReplyDeleteThank you so much.!!
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